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जनता और प्रजातंत्र की रक्षा के लिए
पुलिस व्यवस्थामे सुधार को तुरंत अंमल करिये !!!
मुंबई शहेर पर २६/११ को हुआ आतंकवादी हमला और देशभरमे हुई ऐसी अन्य घटनाए; पुलिस और कानून व्यवस्था के बारेमे उठाए गये कई सवाल; इन मुद्दोंकी पृष्ठभूमीपर आज पुलिस व्यवस्थाको कार्यक्षम और सतर्क बनानेकी जरूरी मेहेसूस हो रही है. अंग्रेजों के जमानेसे चलते आए १८६१ के पुलिस अधिनियम और पुलिस व्यवस्था को बदलकर उनमे आजकी परिस्थिती के अनुरूप व्यापक बदलाव की जरूरत है.
आज पुलिस व्यवस्थामे सुधार का अंमल तुरंत करना इसलिए अनिवार्य बना है की:
पुलिस व्यवस्था स्वतंत्र और स्वायत्त तरिकेसे काम करती रहे और कानून और व्यवस्था रखनेमे कोई राजनितिक दखलअंदाजी और अन्य बाहरी गैरजरूरी दबाव या हस्तक्षेप न हो. पुलिस स्वतंत्र और स्वायत्त होने के बाद उसका गलत ढंगसे इस्तेमाल न हो और जनतासे पुलिसका व्यवहार मैत्रीपूर्ण सहयोग का रहे.
पुलिस व्यवस्था अगर सही ढंगसे और कार्यक्षम तरिकेसे अपना कारोबार चलाती है तो कानून व्यवस्था बनाई रखी जा सकती है. इस बारेमे उच्चतम न्यायालयने कुछ सकारात्मक दिशानिर्देश दिए है. उनके मुताबिक महाराष्ट्र सरकारने पुलिस व्यवस्था मे तुरंत सुधार लानेकी आवश्यकता है ऐसी मांग को लेकर सिटीझन इनिशिएटीव फॉर पीस मुंबईमे काम कर रही है.
पार्श्वभूमी:
अंग्रेजोंके जमानेसे चलते आए पुलिस कानुनोंको बदलने के लिए १९७७ मे इमर्जंसी के बाद पुलिस सुधार के बारेमे सोचने के लिए राष्ट्रीय पुलिस कमीशन गठीत किया गया लेकीन उनकी रपट और सुझाव थंडे बस्तेमे डाल दिए गए. अन्य कमिशन और उनकी सिफारिशों की भी यही अवस्था हुई. इसलिए श्री प्रकाशसींह और एन के. सींग इन रिटायर्ट पुलिस डिजीपी ने सुप्रीम कोर्ट मे १९९६ मे जनहीत याचीका दायर की. सुप्रीम कोर्टने २२ सप्टेंबर २००६ मे नए पुलिस कानून और सुधार के लिए दिशानिर्देश दिए. उन्हे केंद्र और सभी राज्य सरकार द्वारा अंमलमे लाने का निर्देश जारी किया था.
सुप्रीम कोर्ट के कुछ दिशानिर्देश
उच्चतम न्यायालय के उपर दिए हुए पुलिस सुधार के दिशानिर्देशों को अंमल मे लानेके बारेमे महाराष्ट्र सरकारने आस्था नही दिखाई है. कुछ सुधार अंमलमे लाये ही नही गये है और जो कूछ गलत अंमलमे लाए गये है उसका पुलिस सुधार के मामलेमे कुछ भी असर नही हो यह देखा गया है. परिणाम स्वरूप पुलिस सुधार के बारेमे महाराष्ट्रकी स्थिती बिलकूल असंतोषजनक है.
अगर पुलिस व्यवस्थाके कारोबार मे सुधार हो जाती है, तो आज भारतीय समाज के चिंता का विषय रही बहुत सारी समस्यांए कम होगी. उच्चतम न्यायालयने इस बारेमे एक सकारात्मक और आगे जानेवाली दिशा दिखाई है. इसलिऐ पुलिस सुधार का पुरी तरह और कार्यक्षम ढंगसे अंमल करने की मांग को लेकर नागरीकों मे जागृतता पैदा करके सरकारपर दबाव निर्माण करना आज अत्याधिक आवश्यक बन गया है.
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